GS Paper-2 Indian Polity (राजव्यवस्था) Part-1 (Q.48)

GS PAPER-2 (भारतीय राजनीति) Q-48
 
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Q.48 - राजनीति के बढ़ते अपराधीकरण को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ दिशा-निर्देश ज़ारी किये हैं। ये दिशा-निर्देश कहाँ तक कारगर साबित होंगे? समीक्षा कीजिये।
उत्तर :
भूमिका में :-
       राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण और इस पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की चर्चा के साथ उत्तर प्रारंभ करें।
विषय-वस्तु में :-
सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की चर्चा
  प्रत्येक प्रत्याशी चुनाव आयोग को एक फॉर्म भरकर देगा जिसमें वह अपने खिलाफ लंबित मामलों के बारे में स्पष्ट जानकारी देगा।
  प्रत्याशी अपने ऊपर चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी अपनी पार्टी को देगा।
  सभी पार्टियाँ अपने प्रत्याशियों पर चल रहे आपराधिक मामलों की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराएंगी और इसका व्यापक स्तर पर प्रचार करेंगी। हालाँकि निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों के बारे में इस तरह की जानकारी पहले से ही देता रहा है लेकिन इस बार फर्क केवल इतना है कि प्रत्याशियों की पृष्ठभूमि के बारे में मोटे अक्षरों में बताना होगा।
  प्रत्याशी और पार्टियाँ नामांकन दाखिल करने के बाद स्थानीय मीडिया (इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट दोनों) में लंबित आपराधिक मामलों का पूरा विवरण उपलब्ध कराएँ। 
  यह चुनाव आयोग की ज़िम्मेदारी है कि वह मतदाताओं को प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी दे ताकि वे बेहतर जनप्रतिनिधि का चुनाव कर सकें।
  राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने हेतु जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के साथ ही पूर्व में किये गए प्रयासों की संक्षिप्त चर्चा करें।
प्रश्न में चूँकि समीक्षा करने के लिये कहा गया है अतः निम्नलिखित बिंदु को शामिल किया जा सकता है:
  राजनीति में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने हेतु संविधान के अनुच्छेद 102 (1) के अनुसार, संसद इस मामले पर कानून बनाने के लिये बाध्य है। लेकिन इस विषय पर अब तक का इतिहास देखा जाए तो इस बात की संभावना के बराबर ही है कि विधायिका की कार्यवाही के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का पालन किया जाएगा। यदि ऐसा संभव होता तो शायद अब तक इस विषय पर कानून बन चुका होता और निर्वाचन आयोग स्वयं को असहाय महसूस कर रहा होता।
अंत में प्रश्नानुसार संक्षिप्त, संतुलित एवं सारगर्भित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।

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