
→ उत्तर-पूर्वी राज्यों और म्याँमार के बीच कनेक्टिविटी को प्रोत्साहन देने के लिये मोरेह (मणिपुर) और तमू (म्याँमार) के माध्यम से भूमि सीमा पार करने के लिये वीज़ा मानदंडों में छूट देने का फैसला किया गया है। उल्लेखनीय है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की म्याँमार यात्रा के दौरान दोनों देशों ने इस संबंध में एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।
→ वर्तमान में म्याँमार की यात्रा करने वाले भारतीयों को परमिट लेने के लिये यांगून में आवेदन करना आवश्यक होता है तथा परमिट मिलने में 20-30 दिन का समय लगता है। एक बार परमिट मिलने के बाद यात्री वीज़ा के लिये आवेदन कर सकता है। इसके अलावा, भू-यात्रा के लिये भारतीयों को वीज़ा शुल्क के अलावा, टूर गाइड के लिये भी 40 डॉलर का भुगतान करना पड़ता है।
→ नए मानदंडों के अनुसार, म्याँमार भू-यात्रा पर परमिट के प्रावधान को खारिज कर देगा, जिससे पर्यटकों और व्यापारी यात्रियों दोनों के लिये भू-मार्ग के माध्यम से आवागमन सरल हो जाएगा।
नए वीज़ा मानदंडों से लाभ
→ इस समझौते से दोनों देशों के लोगों के वैध पासपोर्टों और वीज़ा के आधार पर लोगों की आवाजाही सुलभ होगी।
→ ज्ञातव्य है कि इससे दोनों देशों के मध्य आर्थिक और सामाजिक संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी।
→ यह समझौता दोनों देशों के लोगों के लिये मौजूदा स्वतंत्र आंदोलन के अधिकारों के विनियमन और अनुकूलीकरण को सरल बनाने में मदद करेगा।
→ इस समझौते के तहत भारत-म्याँमार सीमा पार लोगों की आवाजाही के लिये उचित प्रबंध किये गए हैं।
→ इस समझौते से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों और म्याँमार के लोगों के मध्य संपर्क और आपसी मेलजोल बनाए रखने में मदद मिलेगी।
→ इस समझौते से सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले जनजातीय समुदायों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा होगी, जो भूमि सीमा के पार मुक्त आवाजाही में अभ्यस्त हैं।
→ म्याँमार की सीमा भारत के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, मणिपुर और मिज़ोरम से मिलती है।
→ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भूमि सीमा पार करने के संबंध में भारत और म्याँमार के बीच समझौते को मंज़ूरी दे दी है।















