GS Paper-2 Indian Polity (राजव्यवस्था) Part-1 (Q.30)

GS PAPER-2 (भारतीय राजनीति) Q-30
 
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Q.30 - आदर्श आचार संहिता के बारे में बताते हुए इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दृष्टिकोण को स्पष्ट करें। साथ ही आदर्श आचार संहिता की विशेषताओं को बताते हुए उन विभिन्न तकनीकों का वर्णन करें जो आचार चुनाव संहिता के उद्देश्यों को मजबूत बनाते हैं।
उत्तर :
भूमिका में:
आदर्श आचार संहिता के बारे में -
        आदर्श आचार संहिता वे दिशा-निर्देश होते हैं जो चुनाव की तारीख का एलान होते ही लागू हो जाते हैं और जिनका पालन सभी राजनीतिक पार्टियों को करना होता है।
विषय-वस्तु में:
आदर्श आचार संहिता और इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के नज़रिये -
  आदर्श आचार संहिता को राजनीतिक दलों और चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिये आचरण और व्यवहर का पैमाना माना जाता है। इसका मकसद चुनाव प्रचार अभियान को निष्पक्ष और साफ-सुथरा बनाना तथा सत्ताधारी राजनीतिक दलों को गलत तरीके से फायदा उठाने से रोकना है। इसके अलावा इसका मकसद सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को रोकना भी है।
  आदर्श आचार संहिता किसी कानून के तहत नहीं बनी बल्कि सभी राजनीतिक दलों की सहमति से बनी और विकसित हुई है। चुनाव आयोग समय-समय पर आदर्श आचार संहिता को लेकर राजनीतिक दलों से चर्चा करता रहता है ताकि इसमें सुधार की प्रव्रिया बराबर चलती रहे। सुप्रीम कोर्ट के 2001 में दिये एक फैसले के अनुसार, चुनाव आयोग का नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख से आदर्श आचार संहिता को लागू माना जाता है। यह सभी उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों तथा संबंधित राज्य सरकारों पर तो लागू होती ही है, साथ ही संबंधित राज्य के लिये केंद्र सरकार पर भी लागू होती है।
आदर्श आचार संहिता की विशेषताएँ
  आदर्श आचार संहिता लागू होते ही राज्य सरकारों और प्रशासन पर कई प्रकार के अंकुश लग जाते हैं।
  सरकारी कर्मचारी चुनाव प्रव्रिया पूरी होने तक निर्वाचन आयोग के तहत जाते हैं।
  आदर्श आचार संहिता में रूलिंग पार्टी के लिये कुछ खास गाइडलाइन्स दी गई होती है। इनमें सरकारी मशीनरी और सुविधाओं का उपयोग चुनाव के लिये करने और मंत्रियों तथा अन्य अधिकारियों द्वारा अनुदानों, नई योजनाओं आदि घोषणाओं की मनाही होती है।
  मंत्रियों तथा सरकारी पदों पर तैनात लोगों को सरकारी दौरे के दौरान चुनाव प्रचार करने की इज़ाज़त नहीं होती। साथ ही सरकारी पैसे का इस्तेमाल कर विज्ञापन जारी नहीं किये जा सकते।
  इनके अलावा, चुनाव प्रचार के दौरान किसी के व्यक्तिगत जीवन का जिव्र करने और सांप्रदायिक भावनाएँ भड़काने वाली अपील करने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
  चुनाव सभाओं में अनुशासन और शिष्टाचार कायम रखने तथा जुलूस निकालने के लिये भी गाइडलाइन्स बनाई गई है।
  किसी उम्मीदवार या पार्टी को जुलूस निकालने या रैली और बैठक करने के लिये चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होती है और इसकी जानकारी निकटतम थाने में देनी होती है।
  हैलीपैड, मीटिंग ग्राउंड, सरकारी बंगले, सरकारी गेस्ट हाउस जैसी सार्वजनिक जगहों पर कुछ उम्मीदवारों का कब्ज़ा होकर, इन्हें सभी उम्मीदवारों को समान रूप से मुहैया कराना चाहिये।
चुनाव आयोग द्वारा प्रयोग की जा रही तकनीकों के बारे में -
  आचार संहिता को यूज़र-प्रेंडली बनाने के लिये कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने ‘cVIGIL’ नामक एप लॉन्च किया। इसके ज़रिये चुनाव वाले राज्यों में कोई भी व्यक्ति आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन की रिपोर्ट कर सकता है।
  इसके अलावा चुनाव आयोग नेशनल कंप्लेंट सर्विस, इंटीग्रेटेड कॉन्टैक्ट सेंटर, इलेक्शन मॉनीटरिंग डैशबोर्ड और वन-वे इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसमिटेड पोस्टल बैलट आदि का भी प्रयोग कर रहा है।
निष्कर्ष
        आदर्श आचार संहिता चुनाव सुधारों से जुड़ा एक अहम मुद्दा है जिससे चुनावों में सुधार का रास्ता खुलता है। लेकिन यह भी देखा गया है कि इसके लागू हो जाने के बाद एक-दो महीने तक सरकारी कामकाज़ ठप पड़ जाते है और भारी मात्रा में पैसे की भी बर्बादी होती है। गौरतलब है कि हमारे देश में पूरे साल कहीं--कहीं चुनाव होते ही रहते हैं, इसलिये 1999 में विधि आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में देश भर में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी। इसके अलावा, लोकतंत्र के इस उत्सव को सफल बनाने में चुनाव आयोग की कोशिशों के साथ-साथ देश के नागरिकों की भी यह जवाबदेही है कि इसे सफल बनाएँ।

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