
भूमिका में :-
जेट स्ट्रीम को स्पष्ट करते हुए इसके विकास चक्र की संक्षिप्त चर्चा के साथ उत्तर प्रारंभ करें।
विषय-वस्तु में :-
जेट स्ट्रीम विकास की चारों अवस्थाओं का विश्लेषण -
→ प्रथम अवस्था में जेट स्ट्रीम की स्थिति ध्रुवों के पास होती है।
→ द्वितीय अवस्था में रासबी लहरों के निर्माण के साथ जेट स्ट्रीम का भूमध्य रेखा की ओर विस्तार होने लगता है।
→ तृतीय अवस्था में जेट स्ट्रीम का प्रवाह पूर्णतया लहरनुमा हो जाता है।
→ चतुर्थ अवस्था में अत्यधिक देशांतरीय प्रवाह के कारण तरंगों का विच्छेदन, फलस्वरूप मूल धारा से अलग होकर चक्राकार मार्ग का निर्माण।
जेट स्ट्रीम के महत्त्व पर चर्चा -
→ जेट स्ट्रीम की उपस्थिति के कारण ही मध्य अक्षांशों में चक्रवातों का प्रबल हो जाना, परिणामस्वरूप सामान्य से अधिक वृष्टि।
→ जेट स्ट्रीम के कारण धरातलीय चक्रवातों एवं प्रतिचक्रवातों के स्वरूप में परिवर्तन होने से मौसम में उतार-चढ़ाव।
→ ऊपरी वायुमंडल में अभिसरण तथा अपसरण होने से उच्च तलीय चक्रवातों एवं प्रतिचक्रवातों का निर्माण इत्यादि।
अंत में प्रश्नानुसार संक्षिप्त, संतुलित एवं सारगर्भित निष्कर्ष प्रस्तुत करें।















