। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत।
। Sources of Medieval Indian History। Part-8।

पादशाहनामा (Padshah-nama), मुहम्मद अमीन काज़िनी (Muhammad Amin Qazuini) द्वारा लिखी गयी
→ मुहम्मद अमीन काज़िनी को शाहजहाँ ने अपने शासन का इतिहास लिखने का निर्देश दिया था। उसने शाहजहाँ के शासन के 10 वर्षों तक इसे लिखा, फिर उसे इस काम को बंद करने के लिए कहा गया। काज़िनी ने अपने कम को तीन भागों में बनता, पहले में वः शाहजहाँ के बचपन से उसके गद्दी पर बैठने के बारे में लिखता है। दुसरे भाग में वः शाहजहाँ के शासन के दस वर्षो के बारे में वर्णन करता है। तीसरे भाग में उसने विद्वानों और संतों की सूची दी है। उसके विवरणों को पूर्ण रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता है।
पादशाहनामा, अब्दुल हामिद लाहौरी (Abdul Hamid Lahauri) द्वारा लिखी गयी
→ काज़िनी से यह काम बंद करा के, यह काम अब्दुल हामिद लाहौरी को सौंपा गया। उसने इस किताब को दो भागों में बांटा है। पहला भाग ज्यादातर काज़िनी के ही काम पर आधारित है, जो और विस्तृत रूप में लिखा गया है। दूसरे भाग में उसने शाहजहाँ के अगले 10 वर्षों के शासन के बारे में लिखा था। लाहोरी का काम ज्यादा विस्तृत है, जिससे इतिहासकारों को महत्वपूर्ण सूचनाएं मिलती हैं।
पादशाहनामा, मुहम्मद वारिस (Muhammad Waris) द्वारा लिखी गयी
→ लाहौरी ने अपने कम को 1648 तक किया और 1654 में उसकी मृत्यु हो गयी। अपनी मौत से पहले उसने अपनी जिम्मेदारी अपने शिष्य मुहम्मद वारिस को सौंप दी थी। वारिस ने शाहजहाँ के शासन काल का पूरा इतिहास लिखा है। उसके द्वारा शाहजहाँ के शासन के पहले 20 वर्षों का वर्णन, लाहौरी के काम पर ही आधारित है, परन्तु अगले 10 वर्षों का इतिहास उसने स्वतंत्र होकर लिखा है। उसके द्वारा दिया गया वर्णन शाहजहाँ के शासन काल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है।
मुन्ताखाब-उल-लुबाब या तारीख-ए-खाफी खान (Muntakhab-ul-lubab or Tarikh-i-Khafi Khan)
→ इसे हाशिम काफी खान ने लिखा था। इसने बाबर के भारत पर आक्रमण से प्रारंभ कर, बाद के मुग़ल शासक मुहम्मद शाह के पंद्रह वर्ष के शासन का वर्णन लिखा है। खाफी खां ने औरंगजेब के शासन के बारे में विस्तार से लिखा है। उसने शिवाजी पर, अफजल खां की हत्या का आरोप लगाया है। हैदराबाद के निजाम-उल-मुल्क आसफ जाह के संरक्षण में होने के कारन उसने निजाम की सराहना भी की है।
शाहजहाँनामा (Shahjahan-nama)
→ इस किताब को मुहम्मद ताहिर ने लिखा है, जिसे इनायत खां (Inayat Khan) के नाम से भी जाना जाता है। इनायत खां शाही इतिहासकार था। उसने 1657-58 तक शाहजहाँ के शासन काल का इतिहास लिखा है।
आलमगीरनामा (Alamgirnama-1688 ई.)
→ इसे मिर्ज़ा मुहम्मद काजिम (Mirza Muhammad Qazim) ने लिखा है। इस किताब में उसने आलमगीर औरंगजेब के शासन के 10 वर्षो के इतिहास का वर्णन किया है, इसके बाद औरंगजेब ने इतिहास लेखन पर प्रतिबन्ध लगवा दिया।
फुतुहात-ए-आलमगीरी (Futuhat-i-Alamgiri)
→ फुतुहात-ए-आलमगीरी को एक हिन्दू गुजराती ब्राह्मण ईश्वरदास नागर (Ishwardas Nagar) द्वारा लिखा गया था। इसे गुजरात के सूबेदार शुजात खां ने जोधपुर परगने में अमीन नियुक्त किया था। इस किताब में 1657 से 1700 तक का इतिहास है।
→ इन विवरणों के अलावा हमें अन्य विदेशी यात्रियों के विवरणों से भी सहायता मिलती है|















