। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत।
। Sources of Medieval Indian History। Part-3।

अरबी और फारसी साहित्य (Arabic And Persian Literature)
चाचनामा (Chach-Nama)
→ चाचनामा मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे अरबों की 712 ई. में सिंध विजय की जानकारी मिलती है। मूलतः अरबी भाषा में लिखी इस पुस्तक के लेखक का नाम ज्ञात नहीं है। इस पुस्तक का लेखक संभवतः मुहम्मद-बिन कासिम (Muhammad bin Qasim) के साथ सिंध आया था, चाच का पुत्र दाहिर उस समय सिंध का शासक था, जिसके नाम पर लेखक ने इस किताब का नाम चाचनामा रखा। नासिर-उद-दीन क़ुबाचा (Nasir-ud-din Qubacha) के समय में इस पुस्तक का फारसी में अनुवाद मुहम्मद अली बिन अबू बकर कूफ़ी (Muhammad Ali bin Abu Bakar Kufi) ने किया था।
किताब-उल-यामिनी (Kitab-Ul-Yamini)
→ इस किताब की रचना अबू नासिर-बिन-मुहम्मद अल जब्बार अल उतबी (Abu Nashr-bin-Muhammad al Jabbar Al Utbi) ने की थी। उतबी का सम्बन्ध फारस के उत्ब परिवार से था, जो महमूद गजनवी की सेवा में था। इस कारण उतबी को महमूद गजनवी और उसके कार्यकलापों की व्यक्तिगत जानकारी थी। इस पुस्तक से सुबुक्तगीन (Subuktigin) और महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazn) के 1020 ई. तक का इतिहास पता चलता है। इस पुस्तक से हमें तिथियों का सही विवरण नहीं मिलता परन्तु महमूद गजनवी पर यह एक महान पुस्तक है।
तारीख-ए-मसूदी (Tarikh-i-Masudi)
→ इस किताब को अरबी भाषा में अबुल फजल मुहम्मद-बिन-हुसैन-अल-बैहाकी (Abul Fazal Muhammad-bin-Husain-al-Baihaqi) ने लिखा था। बैहाकी, महमूद गजनवी के उत्तराधिकारी मसूद का एक कर्मचारी था। इससे 1059 ई. तक गजनी वंश के इतिहास, उसके शासन काल और उसके चरित्र की जानकारी मिलती है।
तारीख-ए-हिंद (Tarikh-i-hind)
→ अबु रेहान मुहम्मद बिन अहमद अल-बयरुनी या अल बेरुनी (973-1048) फ़ारसी और अरबी भाषा का एक विद्वान लेखक, वैज्ञानिक, धर्मज्ञ तथा विचारक था, जिसे चिकित्सा, तर्कशास्त्र, गणित, दर्शन, धर्मशास्त्र की भी अच्छी जानकारी थी। ग़ज़नी के महमूद, जिसने भारत पर कई बार आक्रमण किये, के कई अभियानों में वो सुल्तान के साथ था। अपने भारत प्रवास के दौरान उसने संस्कृत सीखी और हिन्दू धर्म और दर्शन का अध्ययन भी किया। उसने अपनी इस अरबी भाषा की किताब में तिथियों का सटीक वर्णन किया है। इस किताब से हमें ११विन शताब्दी के भारत के हिन्दू धर्म, साहित्य और विज्ञान की जानकारी मिलती है। उसने महमूद गजनवी के आक्रमण के समय भारत की स्थिति का विस्तार से वर्णन किया है।
ताज-उल-मासिर (Taj-Ul-Maasir )
→ इस पुस्तक को हसन निजामी (Hasan Nizami) द्वारा लिखा गया था, जो मुहम्मद गोरी (Muhammad of Ghor) के साथ भारत आया था। यह पुस्तक दिल्ली में सल्तनत काल के प्रारंभिक वर्षों की जानकारी का मुख्य स्रोत है। इस पुस्तक में 1192 ई. के ताराइन के युद्ध से 1228 ई. तक क़ुतुब-उद-दीन ऐबक (Qutub-ud-din Aibak) और इल्तुतमिश (Iltutmish) के इतिहास की जानकारी मिलती है। यह समकालीन रचना अरबी और फारसी दोनों में लिखी गयी है।
तबकात-ए-नसीरी (Tabqat-i-Nasiri)
→ तबकात-ए-नसीरी 1260 ई. में मिनहाज अल-सिराज जुज़ानी (Minhaj al-Siraj Juzjani) द्वारा फारसी भाषा में लिखी गयी पुस्तक है। यह पुस्तक भारत पर मुहम्मद गोरी के आक्रमण का वर्णन करती है। मिनहाज़ नासिर-उद-दीन महमूद (Nasir-ud-din Mahmud) के शासन में मुख्य काज़ी और इतिहासकार भी था। इसने ग़ोरी राजवंश या ग़ोरी सिलसिला (Ghurid dynasty) भी लिखी है। तबकात-ए-नसीरी में 23 अध्याय हैं। यह पुस्तक दिल्ली में सल्तनत काल के इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है। तबकात-ए-नसीरी 1229-1230 में दिल्ली के सुल्तान के खिलाफ बंगाल में खलजी विद्रोह की जानकारी का एकमात्र स्रोत है।
इस पुस्तक के कुछ अध्यायों में इस प्रकार जानकारी दी गयी है –
→ खंड 11 – सुबुक्तिगीन से खुसरो मलिक तक के ग़ज़नवी साम्राज्य का इतिहास
→ खंड 17 - ग़ोरी राजवंश का 1215 ई. में उदय और सुल्तान अलाउद्दीन के साथ उनका अंत
→ खंड 19 – गोरी सुल्तान सैफुद्दीन सूरी (Saifuddin Suri) से क़ुतबुद्दीन ऐबक (Qutbuddin Aibek) तक का इतिहास
→ खंड 20 – ऐबक का इतिहास और 1226 में इल्तुतमिश का इतिहास
→ खंड 22 - 1227 से सल्तनत के भीतर दरबारियों, जनरलों और प्रांतीय गवर्नरों की जीवनी आदि, वजीर बलबन के प्रारंभिक इतिहास तक
→ खंड 23 - चंगेज खान के विषय में विस्तृत जानकारी और 1259 तक और उसके उत्तराधिकारी मंगोलों द्वारा मुस्लिमों पर किये गए अत्याचार।















