। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत।
। Sources of Medieval Indian History। Part-6।

तारीख-ए-राशिदी (Tarikh-i-Rashidi)
→ इस किताब को बाबर के चचेरे भर मिर्जा मुहम्मद हैदर दुघलात (Mirza Muhammad Haidar Dughlat) ने फारसी भाषा में लिखा था। मिर्जा हैदर ने बाबर और हुमायूँ के जीवन की घटनाओं को अपनी आँखों से देखा था। उसने, हुमायूँ के साथ शेरशाह सूरी के खिलाफ कन्नौज का युद्ध भी लड़ा था। मिर्जा हैदर ने अपनी किताब को दो भागों में बनता है, पहले भाग में उसने 1347-1553 ई. तक मुग़ल सम्राटों का इतिहास किखा है, और दूसरे भाग में उसने 1541 तक की अपने जीवन की घटनाओं के बारे में लिखा है। दूसरे भाग से हमें ज्यादा महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं।
हुमायूँ-नामा (Humayun-nama)
→ फारसी भाषा में इस किताब को गुलबदन बेगम (Gulbadan Begum) जो बाबर की पुत्री और हुमायूँ की सौतेली बहन थी, ने लिखा है। इस किताब को उसने अकबर के शासनकाल में उसके निर्देशों पर लिखा। उसने बाबर के शासन के बाद की घटनाओं और सम्राटों के शासनकाल की घटनाओं का वर्णन किया है, लेकिन उसने सम्राटों के चरित्र, व्यक्तित्व और परिवार के संबंधों पर ज्यादा जोर दिया है। इस किताब से कोई बहुत महत्वपूर्ण जानकारी नहीं मिलती है।
तारीख-ए-शेर शाही या तौहफा-ए-अकबर-शाही (Tarikh-i-Sher Shahi or Tauhfa-i-Akbar-Shahi)
→ फारसी भाषा में इस किताब को अब्बास खान सरवानी (Abbas Khan Sarwani) ने अकबर के निर्देशों पर लिखा है। इस किताब का केवल कुछ भाग ही उपलब्ध है। इस किताब को उसने शेरशाह की मौत के 40 वर्ष बाद लिखा, और उसने खुद को शेरशाह के परिवार से सम्बंधित बताया है। उसने हर घटना की जानकारी के स्रोत सामग्री का वर्णन किया है, सुर इस किताब की प्रामाणिकता पर संदेह नहीं किया जा सकता है। इसलिए, तारीख-ए-शेर शाही को एक प्रामाणिक स्रोत-सामग्री के रूप में माना गया है। उसने शेरशाह के द्वारा किसानो की देखभाल और जनता के कल्याण के कामों के बारे में भी लिखा है। इस पुस्तक में शेरशाह, इस्लाम शाह और अंत में सूर शासकों के बारे में जानकारी दी गयी है।
तारीख-ए-फ़रिश्ता (Tarikh-i-Firishta)
→ मुहम्मद कासिम हिंदू शाह (Muhammad Qasim Hindu Shah) या फ़रिश्ता ने बीजापुर के शासक आदिल शाह द्वितीय के सेवा में रहते हुए अपने कम को पूरा किया था। उसके द्वारा किये गए काम को तारीख-ए-फ़रिश्ता और गुलशन-ए-इब्राहीम (Tarikh-i Firishta and the Gulshan-i Ibrahim) के नाम से जाना जाता है। फ़रिश्ता ने 13 खंडो के अपने काम में भारत के इतिहास को शुरू से लिखने की कोशिश की है। उसने राजाओं और उनके राज्यों, मुसलिम सूफियों, भारत की भौगोलिक स्थिति और यहाँ की जलवायु के बारे में भी लिखा है।
अकबरनामा (Akbar-nama)
→ फारसी भाषा में इस किताब को अबुल फज़ल (Abul-Fazal) ने लिखा है। इस किताब के तीन प्रमुख भाग हैं, जिसमे पहले भाग में मुगलों का इतिहास आमिर तैमुर (Amir Timur) से लेकर हुमायूँ के शासन तक है। दुसरे और तीसरे भाग में सन 1602 तक के अकबर के शासन का उल्लेख है। अबुल फ़जल उस समय की घटनाओं और उनके कारणों की भी जानकारी दी है। उसने बाबर की तुजुक-ए-बाबरी की कमियों को भी दूर करने का प्रयास किया है। उसने विस्तार में हुमायूं के शासनकाल की घटनाओं का वर्णन किया और शेरशाह की हुमायूं के साथ प्रतिद्वंदिता का विवरण भी दिया है। उसने अकबर के शासन, उसकी नीतियों और उनके प्रभावों के बारे में विस्तार से लिखा है। अकबरनामा मुग़ल इतिहास को जानने का एक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय स्रोत है।
→ उसने बाबर, हुमायूँ और विशेष रूप से अकबर की महिमा का वर्णन किया है, साथ ही शेर शाह और इस्लाम शाह की बुरे भी की है। इस किताब के तीसरे भाग को आईन-ए-अकबरी (Ain-i-Akbari) के नाम से भी जाना जाता है।
आईन-ए-अकबरी (Ain-i-Akbari)
→ फारसी भाषा में इस किताब को भी अबुल फज़ल ने लिखा था। इस किताब में अबुल फज़ल ने अकबर के शासनकाल की घटनाओं का वर्णन नहीं किया है, बल्कि उसके प्रशासन, कानून, नियम, विनियम आदि का वर्णन है। यह किताब भी 3 खण्डों में लिखी गयी है। अबुल फज़ल ने इसमें शाही खजाने, सिक्कों, हरम, अदालत, समारोह, सैन्य और नागरिक अधिकारियों, उनके पद, न्याय और राजस्व प्रशासन की स्थिति, राज्य की आय के स्रोतों और व्यय, अकबर का दीन-ए-इलाही, विदेशी आक्रामकता, हिंदू और मुस्लिम संतों और विद्वानों, आदि के बारे में लिखा है। इसलिए, आईन-ए-अकबरी को अकबर के शासनकाल के दौरान संस्कृति और प्रशासन के बारे में जानने का एक अनमोल स्रोत माना गया है।















