। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत।
। Sources of Medieval Indian History। Part-4।

खजाइन-उल-फुतूह (Khazain-ul-Futooh)
→ खजाइन-उल-फुतूह का अर्थ होता है ‘जीत के खजाने’। यह किताब आमिर ख़ुसरो (Amir Khusrow) द्वारा लिखी गयी है। ख़ुसरो एक जाने-माने लेखक थे जो 1290 से लेकर 1325 ई. तक दिल्ली के सुल्तान जला-उद-दीन खलजी (Jala-ud-din Khalji) से लेकर मुहम्मद बिन तुगलक (Muhammad-bin-Tughluq) के समकालीन थे। वे अपने समकालीन लगभग सभी सुल्तानों के दरबार में प्रमुख कवि थे। उन्होंने सभी घटनाओं को अपनी आँखों से देखा था इसलिए किये गए कार्य बहुत महत्वपूर्ण हैं।
मिफ्ताह-उल-फुतूह (Miftah-ul-Futooh -1291 ई.)
→ मिफ्ताह-उल-फुतूह (जीत के लिए कुंजी) भी आमिर ख़ुसरो द्वारा लिखी गयी है, इसमें जलालुद्दीन खिलजी की जीत की प्रशंसा की गयी है। इसमें मालिक छज्जू द्वारा किये गए विद्रिः का भी वर्णन है।
किरान-उस-सादैन (Qiran-us-Sa’dain-1289 ई.)
→ किरान-उस-सादैन (दो शुभ सितारों की बैठक), आमिर ख़ुसरो द्वारा लिखी गयी इस किताब में बुगरा खां (Bughra Khan) और उसके बेटे कैकुबाद (Kikabad) की भेंट और समझौते का वर्णन है।
इश्किया / मसनवी दुवल रानी-ख़िज़्र खाँ (Ishqia/Mathnavi Duval Rani-Khizr Khan-1316 ई.)
→ आमिर ख़ुसरो द्वारा लिखी इस मसनवी (कविता) में अलाउद्दीन के पुत्र खिज्र खां और गुजरात के राजा करन सिंह की पुत्री दुवल रानी के प्रेम का वर्णन है। इसमें अलाउद्दीन की गुजरात विजय का भी वर्णन है।
नुह सिपहर (Noh Sepehr-1318 ई.)
→ इस मसनवी में भारत और उसकी संस्कृति की खुसरो ने अपनी धारणाओं के बारे में लिखा है।
तुगलकनामा (Tughluq Nama-1320 ई.)
→ ख़ुसरो ने इसमें तुगलक वंश के शासन का इतिहास लिखा है। इस किताब में गयासुद्दीन तुग़लक़ (Ghiyath al-Din Tughluq) की ख़ुसरो खां पर जीत का उल्लेख है, जिसके परिणामस्वरूप तुगलक वंश की स्थापना हुई। इस आमिर ख़ुसरो की अंतिम ऐतिहासिक कृति माना जाता है।
तारीख-ए-फिरोजशाही (Tarikh-i-Firozshahi-1357 ई.)
→ जिया-उद-दीन बरनी (Zia-ud-din Barani) ने तारीख तारीख-ए-फिरोजशाही को लिखा था। बरनी, गयासुद्दीन तुग़लक़, मुहम्मद-बिन-तुगलक और फिरोज शाह तुगलक का समकालीन था। इस किताब में बरनी ने बलबन के शासन काल से लेकर फिरोज शाह तुगलक के शासन के छठें वर्ष तक के इतिहास का वर्णन किया है। बरनी ने सुल्तानों और उनके सैन्य अभियानों के अलावा, उस समय की सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक दशा एवं न्याय व्यवस्था का भी विस्तृत वर्णन किया है। उसने साम्राज्य के उच्च पदाधिकारियों, अमीरों और सूफी संतो का भी वर्णन किया है। बरनी ने अल्लाउद्दीन की बाजार नियंत्रण व्यवस्था और आर्थिक सुधारों का भी विस्तार से वर्णन किया है। राजस्व प्रशासन का पूरी तरह से वर्णन इस पुस्तक की प्रमुख विशेषता है।
तारीख-ए-फिरोजशाही (Tarikh-i-Firozshahi-1398 ई.)
→ इस पुस्तक की रचना, शम्स-ए-सिराज अफीफ (Shams-i-Siraj Afif) ने की थी। अफीफ की यह पुस्तक फिरोजशाह तुगलक़ के शासन काल का विस्तृत वर्णन देती है। अफीफ ने इसे तैमुर के आक्रमण के कुछ समय बाद लिखा था। फारसी भाषा में लिखी इस पुस्तक में फिरोजशाह के शासन काल की सैन्य, राजनैतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का वर्णन है। फिरोजशाह द्वारा प्रचलित जागीर प्रथा का भी इसमें वर्णन है। फिरोजशाह के शासन काल की जानकारी के लिए यह एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।















