। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के स्रोत।
। Sources of Medieval Indian History। Part-2।

रामचरित (Ramacharitam)
→ संस्कृत भाषा में लिखित इस महाकाव्य कविता की रचना संध्याकर नंदी ने की थी। इसमें 1050 ई. से 1150ई. तक बंगाल के पाल वंश का वर्णन मिलता है। इस किताब में रामायण और राजा रामपाल की कहानी एक साथ लिखी गयी है। इस पुस्तक में रामपाल की प्रशंसा की गयी है, लेकिन यह पाल वंश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। किताब में बंगाल के पाल वंश के राजा महिपाल द्वितीय की उनके एक अधिकारी दिव्य द्वारा हत्या से लेकर मदनपाल के शासन तक का उल्लेख है।
बल्लालचरित (Ballal Charit)
→ इस पुस्तक की रचना आनंद भट्ट ने की थी। इसमें बंगाल के सेन वंश और 1160 ई. से 1179ई. तक सेन वंश के दुसरे शासक बल्लाल सेन का वर्णन मिलता है। सेन वंश के शिलाकेखों के अनुसार बल्लाल सेन भी एक लेखक था और उसके दानसागर और अदभुतसागर जैसी किताबे भी लिखीं।
पृथ्वीराज रासो (Prithviraj Raso)
→ पृथ्वीराज रासो या राजस्थानी में पृथ्वीराज रासो चंद बरदाई द्वारा रचित एक महाकाव्य है, जिसमे उन्होंने चौहान राजा पृथ्वीराज तृतीय के जीवन का वर्णन किया है, जो अजमेर और दिल्ली पर 1165 से 1192 ई. तक शासन करते थे। कवि चंदबरदाई पृथ्वीराज के समकालीन कवि और उनके मित्र भी थे। पृथ्वीराजरासो ढाई हजार पृष्ठों का वृहद् ग्रन्थ है, जिसके अंतिम भाग को चंदबरदाई के पुत्र जल्हण द्वारा पूर्ण किया गया। इस पुस्तक में पृथ्वीराज और संयोगिता के प्रेम और शहाबुद्दीन द्वारा उसे बन्दी बनाकर गज़नी ले जाने और पुस्तक के अंत में शब्दभेदी बाण द्वारा शहाबुद्दीन गौरी को मारने का उल्लेख है।
→ पृथ्वीराज रासो को वीर रस का हिंदी का सर्वश्रेष्ठ काव्य तथा हिन्दी का प्रथम महाकाव्य भी माना जाता है। यह काव्य पिंगल भाषा में लिखा गया जो कालान्तर में बृज भाषा के रूप में विकसित हुई। इसमें पृथ्वीराज के विलासप्रियता और और राजकुमारियों के अपहरण और विवाह के लिए लडे गए युद्धों का वर्णन है।
इसी प्रकार कुछ अन्य रचनाएँ इस प्रकार हैं -
→ कुमारपालचरित् की रचना 12वीं सदी में जय सिंह ने की थी, जिसमे अन्हिलवाडा के शासक कुमारपाल का वर्णन है।
→ गौडवहो की रचना वाक्यपतिराज ने की थी, जिसमे कन्नौज के राजा यशोवर्मन के युद्ध विजयों और चालुक्य वंश के शासन के अंतिम समय की जानकारी मिलती है।
→ नवसाहसांकचरित को पद्म्गुप्त परिमल ने लिखा था, जिसे वाक्पति मुंज ने आश्रय दिया था। इसमें परमार वंश के इतिहास का वर्णन मिलता है।
→ विक्रमांकदेवचरित् की रचना 1079 ई. से 1126 ई. के बीच विल्हण नाम के कवि ने की थी, जिससे कल्याणी के चालुक्य वंश के इतहास की जानकारी मिलती है।















