। सिन्धु घाटी सभ्यता।
। Indus Valley Civilization। Part-3।

सिंधु सभ्यता के विकास के चरण
नवपाषाण काल (5500-3500 ई.पू.)-
→ इस काल में बलूचिस्तान और सिंधु के मैदानी भागों में स्थित मेहरगढ़ और किली गुल मुहम्मद जैसी बस्तियाँ उभरीं। खेती की शुरूआत हुई, स्थायी गाँव बसे।
पूर्व हड़प्पा काल (3500-2600 ई.पू.)-
→ ताँबा, चाक एवं हल का प्रयोग हुआ। अन्नागारों का निर्माण हुआ। ऊंची-ऊँची दीवारें बनीं। सुदूर व्यापार की शुरूआत हुई।
पूर्ण विकसित हड़प्पा युग (2600-1800 ई.पू.)-
→ सम्पूर्ण विकसित क्षेत्र 12,99,600 वर्ग कि.मी. था। यह पूरब से पश्चिम 1600 कि.मी. एवं उत्तर से दक्षिण 1400 कि.मी. था। हड़प्पा सभ्यता से संबद्ध लगभग 1400 स्थल प्रकाश में आए हैं। इनमें लगभग 6 अथवा 7 स्थलों को नगर का दर्जा दिया जाता हैं। उत्तरी क्षेत्र जम्मू में मांडा, दक्षिण में दैमाबाद, पश्चिम में सुत्कागेडोर और 3 पूरब में आलमगीरपुर इसकी सीमा है।
1. सिंध- मोहनजोदड़ो चांहुदड़ो, जुडेरजोदड़ो, आमरी, कोटदीजी, अलीमुराद।
2. पंजाब- हड़प्पा, रोपड, बारा, संघोल।
3. हरियाणा- राखीगढ़ी, मिताथल, बनवाली।
4. राजस्थान- कालीबंगा।
5. जम्मू- मांडा।
6. गंगा-यमुना, दोआब- आलमगीरपुर, हुलास।
7. गुजरात- देशलपुर, सुरकोटड़ा, धौलावीरा (कच्छ प्रदेश) काठियावाड्-रंगपुर, रोजदी, लोथल, मालवण (सूरत) भगवतरव।
8. बलूचिस्तान- सुत्कागेडोर, सुतकाकोह, बालाकोट, डाबरकोट, राणां घुंड।
9. बहावलपुर- कुडवालाथेर।
10. अफगानिस्तान- शोर्तुघई।
11. गोमल घाटी- रहमान ढेरी।















