GS Paper-2 Govt. Administration (शासन व्यवस्था) Q.09

GS PAPER-2 (शासन व्यवस्था) Q-09
{Government Administration}


अरुणाचल प्रदेश में विद्यालयों का वर्गीकरण
चर्चा में क्यों?
       अरुणाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में मंज़ूर स्थानांतरण एवं नियुक्ति नीति-2020’ (Transfer & Posting Policy, 2020) के अनुसार सभी सरकारी विद्यालयों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया।
मुख्य बिंदु:
  अरुणाचल प्रदेश के 3, 513 सरकारी विद्यालयों तथा 211 सामुदायिक विद्यालयों में शिक्षकों की अनुपस्थिति एक प्रमुख मुद्दा है।
  अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा नगरीय क्षेत्रों में बेहतर पहुँच के कारण इन क्षेत्रों में छात्र-शिक्षक अनुपात पक्ष में है।
  छात्रों के शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिये शिक्षकों का आवश्यकता-आधारित वितरण एवं नियुक्ति में स्वतंत्र और पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर शिक्षकों को नौकरी में संतुष्टि प्रदान करने के लिये अरुणाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने स्थानांतरण एवं नियुक्ति नीति-2020’ (Transfer & Posting Policy, 2020) को मंज़ूरी प्रदान की है।
क्या है सरकारी विद्यालयों का वर्गीकरण:
  अरुणाचल प्रदेश में स्थानांतरण एवं नियुक्ति नीति-2020’ के तहत सभी सरकारी विद्यालयों का वर्गीकरण हार्ड’(Hard), ‘मीडियम (Medium)’ और सॉफ्ट’ (Soft), श्रेणियों में किया जाएगा।
  विद्यालयों का यह वर्गीकरण नियुक्ति स्थान की भौगोलिक स्थलाकृति, विद्यालय तक पहुँच, नियुक्ति स्थान पर रुकने की व्यवस्था में कठिनाई के आधार पर किया जाएगा।
  इस वर्गीकरण का कारण विद्यालयों के आस-पास की भौगोलिक स्थिति, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की उनके पसंदीदा क्षेत्र के अलावा दूसरे क्षेत्र में काम करने की अनिच्छा है।
  इस नई नीति के तहत सभी नव-नियुक्त शिक्षकों को तीन वर्ष एवं परिवीक्षा अवधि के दौरान हार्डश्रेणी के विद्यालयों में नियुक्त किया जाएगा।
  इसके बाद इन्हें पाँच वर्षों तक मीडियमश्रेणी वाले विद्यालयों में नियुक्त किया जाएगा और तत्पश्चात् इनकी नियुक्ति सॉफ्टश्रेणी वाले विद्यालयों में की जाएगी।
  अरुणाचल प्रदेश राज्य के शिक्षा विभाग को दूरदराज़ के उन क्षेत्रों में 16, 594 नियमित शिक्षकों को नियुक्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जहाँ स्कूलों में छात्र तो पर्याप्त संख्या में हैं परंतु शिक्षकों की भारी कमी है।
  इस नीति के तहत शिक्षकों का स्थानांतरण ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से अप्रैल / मई के महीने में किया जाएगा।
  पूर्वोत्तर क्षेत्र के अंतर्गत समृद्ध जनजातीय, सांस्कृतिक, भाषायी विविधता और उच्च साक्षरता दर वाले आठ राज्य आते हैं। इस पूरे क्षेत्र में शिक्षा के आधारभूत ढाँचे और सुविधाओं का अभाव है, अतः इस क्षेत्र में दी जा रही शिक्षा का स्तर तथा इससे संबंधित आधारभूत ढाँचे को सुधारने की आवश्यकता है।


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