हाल ही में संचार मंत्रालय (Ministry of Communications) द्वारा राष्ट्रीय मीडिया केंद्र, नई दिल्ली में राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान (National Broadband Mission) की शुरुआत की गई।
प्रमुख बिंदु:
→ यह अभियान, राष्ट्रीय डिजिटल संचार नीति, 2018 (National Digital Communications Policy, 2018) का हिस्सा है।
→ अभी तक भारतनेट (BharatNet) कार्यक्रम के माध्यम से ब्रॉडबैंड सेवाएँ 142, 000 गाँवों के ब्लॉकों तक पहुँच चुकी हैं।
विज़न:
राष्ट्रीय ब्रॉडबैंड अभियान का विज़न डिजिटल संचार ढाँचे का त्वरित विकास, डिजिटल अंतर की समाप्ति, डिजिटल सशक्तीकरण तथा समावेश पर आधारित है।
उद्देश्य:
इस अभियान का उद्देश्य तीन सिद्धांतों पर आधारित है:
→ सभी के लिये ब्रॉडबैंड की उपलब्धता
→ गुणवत्तायुक्त सेवा
→ किफायती सेवा।
लक्ष्य:
→ ग्रामीण व सुदूर क्षेत्रों समेत पूरे देश में वर्ष 2022 तक ब्रॉडबैंड सेवा को उपलब्ध कराना।
→ वर्ष 2024 तक टावर घनत्व प्रति एक हजार की आबादी पर 0.42 से बढ़ाकर 1.0 करना।
→ मोबाइल और इंटरनेट सेवा की गुणवता बेहतर करना।
→ राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के साथ मिलकर कार्य करने के लिये राइट ऑफ वे (Right of Way- RoW) मॉडल विकसित किया जाएगा।
→ यह मॉडल ऑप्टिक फाइबर बिछाने समेत डिजिटल अवसंरचना के विस्तार संबंधी नीतियों के लिये सहायक होगा।
→ राज्य / केंद्रशासित प्रदेश में उपलब्ध डिजिटल संचार अवसंरचना और अनुकूल नीति ईको-सिस्टम को मापने के लिए ब्रॉडबैंड रेडीनेस इंडेक्स (Broadband Readiness Index- BRI) विकसित किया जाएगा।
→ पूरे देश के लिये डिजिटल फाइबर मानचित्र तैयार किया जाएगा। इसमें संचार नेटवर्क व अवसंरचना, आप्टिक फाइबर केबल, टावर आदि को शामिल किया जाएगा।
→ डिजिटल अवसंरचना और सेवाओं के निर्माण तथा विस्तार को गति प्रदान करने के लिये नीतिगत एवं नियामक संबंधी नियमों में बदलाव करना।
→ हितधारकों द्वारा 100 बिलियन डॉलर का निवेश। इसमें यूनिवर्सल सर्विस आब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund- USOF) का 70, 000 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है।
→ अभियान में निवेश के लिये संबंधित मंत्रालयों/ विभागों/ एजेंसियों समेत सभी हितधारकों के साथ कार्य करना।
यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (Universal Service Obligation Fund- USOF)
→ यह ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में लोगों तक वहन योग्य कीमतों पर गैर-भेदभावपूर्ण गुणवत्तापूर्ण सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (Information and Communication Technology- ICT) सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करता है।
→ इसका गठन वर्ष 2002 में दूरसंचार विभाग के तहत किया गया था।
→ इस फंड के लिये संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता होती है और इसे भारतीय टेलीग्राफ (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत वैधानिक समर्थन प्राप्त है।















