Ancient History । Chapter-7 P-1


सिन्धु घाटी सभ्यता

Indus Valley Civilization। Part-1



  विश्व का कौन-सा कोना सर्वप्रथम सभ्यता की प्रथम किरण से प्रकाशित हुआ था, इसका कोई ज्ञान दुर्भाग्यवश प्राप्त नहीं है। हाँ, इतना अवश्य ज्ञात हो। सका है कि सभी सभ्यताएँ नदी घाटियों में ही उदित हुई। भारत में भी सिन्धु नदी की घाटी में एक सभ्यता का जन्म हुआ जिसका ज्ञान हमें लम्बे समय तक नहीं रहा। सिन्धु सभ्यता आद्य-ऐतिहासिक काल की सभ्यता थी। आद्य-ऐतिहासिक काल इसे इसलिए कहा जाता है क्योंकि सिन्धु लिपि को अब तक नहीं पढ़ा जा सका है। यह आश्चर्यजनक सांस्कृतिक उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व करता है। यह पुरातन तथा आधुनिक भारतीय सभ्यता के कुछ महत्त्वपूर्ण आयामों के दृष्टिकोण से भी महत्त्वपूर्ण है।

  इस सभ्यता का अभिज्ञान पुरातत्त्व विज्ञान की एक महत्त्वपूर्ण देन है। इस सभ्यता की खोज ने भारतीय सभ्यता के इतिहास को ही बदल दिया है। आर्यों के साहित्यिक वेदों से ही पहली बार हमें भारत के सामाजिक एवं धार्मिक विचारों तथा आर्थिक और राजनैतिक अवस्थाओं का विस्तृत परिचय मिला। फलत: यह अवश्यंभावी था कि व्यावहारिक दृष्टि से भारत का इतिहास इस काल से प्रारम्भ किया जाये और भारतीय संस्कृति की रूपरेखा का आरम्भ आर्य सभ्यता से हो। किन्तु, 1922-23 . में होने वाली एक खोज के परिणामस्वरूप इस धारणा में परिवर्तन हुआ। इस धारणा के परिवर्तन का कारण था सिन्धु क्षेत्र में होने वाले उत्खननों के फलस्वरूप एक अत्यन्त पुरातन सभ्यता की खोज। सिन्धु घाटी की सभ्यता इसी खोज का प्रतिफल है।


कालनिर्धारण

  एच. हेरास ने नक्षत्रीय आधार पर इसकी उत्पत्ति का काल 6000 .पू. माना है। मेसोपोटामिया में 2350 .पू. का सरगॉन का अभिलेख मिला है, उसके आधार पर इसकी समयावधि 3250-2750 .पू. मानी गयी है।

  जॉन मार्शल ने 3250-2750 .पू. में इसका काल निर्धारित किया है जबकि अर्नेस्ट मैके ने 2800-2500 .पू. को इसका काल माना है।

  माधोस्वरूप वत्स ने 3500-2700 .पू. और सी.जे. गैड ने 2300-1750 .पू. इसका काल माना है। माटींसर व्हीलर 2500-1500 .पू. को इस सभ्यता का काल मानते हैं जबकि फेयर सर्विस 2000-1500 .पू. को। रेडियो कार्बन पद्धति के अनुसार, इसका समय 2350 .पू. से 1750 .पू. माना गया है। इस संदर्भ में ऐसा माना जाता है कि इसका काल लगभग 2600 .पू. एवं 1900 .पू. के बीच निर्धारण किया जा सकता है।


नामकरण

  इसके लिए कई नाम प्रचलित हैं, यथा, सिन्धु घाटी की सभ्यता, सिन्धु सभ्यता, हड़प्पा सभ्यता और हाल में इसके लिए सिन्धु-सरस्वती सम्पदा जैसे नामकरण पर बल दिया जाने लगा है किन्तु हड़प्पा सभ्यता नाम अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है क्योंकि पुरातात्विक उत्खनन के पश्चात् किसी सभ्यता का नामकरण प्रथम उत्खनित स्थल के आधार पर किया जाता रहा है।


पुरातात्विक स्रोत

  हमें पुरातात्विक स्रोत से ही मुख्यतः इस सभ्यता का अभिज्ञान प्राप्त होता है क्योंकि इस सभ्यता के बारे में कोई साहित्य उपलब्ध नहीं है। मुहर, टेरीकोटा फिगर्स (मृण्मूर्तियाँ), चक्र की आकृति, महल और खण्डहर, मेसोपोटामिया से प्राप्त बेलनाकार मुहर, लोथल से प्राप्त एक छोटी बेलनाकार मुहर, 2350 .पू. की मेसोपोटामिया की मुहर, मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक वाट और लोथल से प्राप्त हाथी दाँत के माप का पैमाना आदि स्रोत उल्लेखनीय हैं।