। अर्थव्यवस्था- सिन्धु घाटी सभ्यता।
। Economy- Indus Valley Civilization। Part-2।

व्यापार एवं बाह्य देशों से संबंध
→ अन्य समकालीन सभ्यताओं जैसे मेसोपोटामिया, मिश्र आदि से सैन्धव लोगों का सम्पर्क व्यापारिक तथा सांस्कृतिक दोनों ही प्रकार का था। सैन्धव लोगों के लिए व्यापार का अत्यधिक महत्त्व था। इस दृष्टि से उन लोगों ने बहुत प्रगतिशील नीति अपनाई थी। उन लोगों के विभिन्न देशों से व्यापारिक सम्बन्ध होने के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं। सैन्धव स्थलों के उत्खनन से ऐसी पर्याप्त सामग्री मिली है जिनके लिए कच्चा माल आस-पास के क्षेत्रों में उपलब्ध नहीं था। अत: इसका आयात बाहर से किया जाता रहा होगा। सैन्धव नगरों का व्यापारिक सम्बन्ध मेसोपोटामिया तथा फारस की खाड़ी से था, इस तथ्य के अनेक पुरातात्त्विक प्रमाण मिलते हैं।
→ सैन्धव सभ्यता की वे मुद्राएं सबसे महत्त्वपूर्ण साक्ष्य हैं जो मेसोपोटामिया के विभिन्न नगरों में पाई गई हैं। विद्वानों की मान्यता है कि ये वस्तुत: व्यापार के माध्यम से वहाँ पहुँची थीं। कुछ इतिहासकारों की यह भी धारणा है कि सैन्धव जनों ने सम्भवत: मेसोपोटामिया में व्यापारिक बस्ती की स्थापना की हो। किन्तु, लम्बर्ग कार्लोव्सकी इस मत से सहमत नहीं हैं कि मेसोपोटामिया में सैन्धव लोगों की बस्ती थी। मात्र मुद्राओं की प्राप्ति को उनके अनुसार इस तथ्य का मौलिक आधार नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार सैन्धव नगरों में निर्मित जिस प्रकार की वस्तुएं मेसोपोटामिया में मिली हैं, वे इस तथ्य के लिए पर्याप्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं करती कि वहाँ सैन्धव व्यापारियों ने बस्ती बसाई थी, इस प्रकार की वस्तुएं सीधे सम्पर्क के बिना बिचौलियों द्वारा वहाँ पहुँचाई जा सकती थीं क्योंकि सैन्धव स्थलों में एक भी मुहर अथवा लेख मेसोपोटामिया का उपलब्ध नहीं हुआ है। दूसरे, मेसोपोटामिया में केवल एक ही ऐसी मुद्रा उम्मा नामक स्थल से मिली है, जिसे निश्चयपूर्वक सैन्धव सभ्यता का कहा जा सकता है।
→ इसके अतिरिक्त सैन्धव स्थलों के उत्खनन में ऐसे भवन के अवशेष नहीं मिले जिन्हें मेसोपोटामिया शैली का कहा जा सके। इतना ही नहीं, मेसोपोटामिया के किसी भी स्थल से सैन्धव उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हुए हैं। किन्तु, अधिकांश विद्वान् लम्बग कार्लोव्सकी के मत का सैन्धव सभ्यताओं के मध्य सम्पर्क को प्रमाणित करते हैं। सैन्धव जनों द्वारा निर्मित अथवा उसके सदृश अनेक मुद्रायें मेसोपोटामिया के विभिन्न स्थलों से मिली हैं। हड़प्पा स्थलों से प्राप्त बेलनाकार मुद्रायें मेसोपोटामिया में निर्मित अथवा उससे प्रेरित मानी जाती हैं।
→ कुछ मुद्रायें, जो बहरीन से प्राप्त हुई हैं उन पर सैन्धव लिपि के चिह्न हैं। इस द्वीप में उपलब्ध अन्य मुद्राओं की तरह कुछ मुहरें दक्षिणी मेसोपोटामिया और एक लोथल से मिली है। हड़प्पाकालीन जो वस्तुएं मेसोपोटामिया से मिली हैं वे दोनों सभ्यताओं के संबंध को दर्शाने के लिए काफी हैं। हड़प्पाकालीन मुहर-मेसोपोटामिया के सूसा और ऊर में मिले हैं। हाल ही में फारस की खाड़ी में फैलका और बहरीन तथा मेसोपोटामिया के निप्पुर में सिंधु सभ्यता की मुहरें पाई गयी हैं जो चौकोर हैं, जिन पर एक सींग वाले पशु की आकृति एवं सिंधु लिपि उत्कीर्ण है। तेल अस्मार (मेसोपोटामिया में) से हड़प्पाकालीन लाल पत्थर का मनका प्राप्त होता है। उसी तरह पक्की मिट्टी की छोटी मूर्ति निप्पुर से प्राप्त होती है।
→ मोहनजोदड़ो में मेसोपोटामिया की एक बड़ी बेलनाकार मुहर प्राप्त हुई है। लोथल से मेसोपोटामिया की एक छोटी बेलनाकार मुहर प्राप्त हुई है। लोथल से तांबे का ढला हुआ धातु पिंड भी मिला है। मेसोपोटामिया से प्राप्त एक कपड़े पर सिंधु सभ्यता की एक मुहर की छाप है। मध्य एशिया में तुर्कमेनिस्तान नामक जगह से सिंधु सभ्यता की कुछ वस्तुएं प्राप्त हुई हैं। लोथल से मिट्टी की बनी एक नाव की प्रतिमूर्ति मिली है।
→ सिंधु घाटी में मानक माप एवं बाट के प्रयोग का साक्ष्य मिला है। हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो से धान्य कोठारों का साक्ष्य मिला है। संभवत: कालीबंगा में भी धान्य कोठार मौजूद था। मेसोपोटामिया में स्थित अक्काड़ के प्रसिद्ध सम्राट् सरगौन (2350 ई.पू.) ने यह दावा किया था कि दिलमन, माकन और मेलुहा के जहाज उसकी राजधानी में लंगर डालते थे। दिलमन की पहचान बहरीन से माकन की मकरान (बलूचिस्तान) से और मेलुहा की सिन्धु सभ्यता से की गई है।















