कक्षा 11 (पाठ - 2) भारतीय संविधान में अधिकार Part-3

कक्षा 11 (पाठ - 2) भारतीय संविधान में अधिकार
Class- 11th NCERT
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भारतीय संविधान में अधिकार

UPSC Based Questions (100- 150 Words)

1.   निम्न लिखित गद्यांश को पढ़िए तथा नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
"संविधान में कुछ नीति निर्देशक तत्वों का समावेश तो किया गया है लेकिन उन्हें न्यायलय के माध्यम से लागू करवाने की व्यवस्था नहीं की गई। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि सरकार किसी निर्देश को लागू नहीं करती तो हम न्यायलय में जाकर यह मांग नहीं कर सकते कि उसे लागू कराने के लिए न्यायलय सरकार को आदेश दें। संविधान निर्माताओं का मानना था कि इन निर्देशक तत्वों के पीछे जो नैतिक शक्ति है वह सरकार को बाध्य करेगी कि सरकार नीति निर्देशक तत्वों को गंभीरता से ले।
1.   संविधान में वर्णित नीति निर्देशकों को किसका पूरक माना गया है?
2.   क्या नीति-निर्देशक तत्वों के उल्लघंन पर आप न्यायलय जा सकते है?
3.   राज्यों को नीति-निर्देशक तत्वों को लागू करवाने में कौन-सी शक्ति काम करती है?
4.   नीति निर्देशक तत्वों एवं मौलिक अधिकारों में अन्तर स्पष्ट करो?
उत्तर- i. नीति निर्देशक तत्वों को मौलिक अधिकार का पूरक माना गया है।
ii. नीति निर्देशक तत्वों के उल्लंघन पर न्यायालय नहीं जा सकते हैं
iii. नैतिक शक्ति अथवा जनमत की शक्ति।
iv. (1) मौलिक अधिकार न्याय संगत है। नीति निर्देशक तत्व न्याय संगत नहीं है।
(2) मौलिक अधिकार कुछ कार्यों को करने पर प्रतिबंध लगाते हें जबकि निर्देशक तत्व कार्य करने की प्रेरणा देते हैं।
(3) मौलिक अधिकार व्यक्ति से तो निर्देशक तत्व समाज (राज्यसे संबंधित हैं। (कोई दो)
2.   भारतीय संविधान में निहित मौलिक अधिकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर- मौलिक अधिकार-
v  समता,
v  स्वतंत्रता,
v  शोषण के विरूद्ध अधिकार
v  धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार
v  शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार
v  संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
3.   समानता के अधिकार को निम्न बिन्दुओं के अन्तर्गत समझाइए-
उत्तर- i. कानून की नजर में गरीब एवं अमीर एक समान हैं। कानून की धाराएं सभी पर एक समान लागू होती है।
ii. रंगजातिनस्लक्षेत्र के आधार पर भेदभाव की मनाही।
iii. रोजगार (नौकरियोंमें अवसर-समान योग्यतासमान परीक्षा में बैठने के मौके (अवसर)
ü  कानून के समक्ष समानता।
ü  भेदभाव को निषेध (मनाही)
ü  रोजगार (नौकरियोंमें अवसर की समानता।
4.   धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को लोकतंत्र का प्रतीक या आधार माना जाता हे। उपर्युक्त कथन को तर्क सहित सिद्ध कीजिए।
उत्तर- एक लोकतांत्रिक देश में प्रत्येक नागरिक महत्वपूर्ण होता है। उसको मतधर्मविचार मानने की आजादी होती है। लोकतंत्र में प्रत्येक व्यक्ति महत्वपूर्ण है। इसलिए इस अधिकार को लोकतंत्र का प्रतीक कहते है।
Ø  किसी भी धर्म को मानने एवं प्रचार करने की आजादी।
Ø  सर्वजन हिताय-धार्मिक समुदाय बनाने की आजादी।
Ø  धर्म विशेष के लिए कर (TAX)  देने की आजादी।
Ø  सरकारी स्कूल कॉलेजों में धार्मिक शिक्षा पर पाबंदी।
5.   डॉभीमराव अम्बेडकर ने किस अधिकार को 'संविधान का हृदय और आत्माकी संज्ञा दी है। इसके अन्तर्गत न्यायालय द्वारा जारी विशेष आदेशों (रिटोंको सविस्तार समझाइए।
उत्तर- संवैधानिक उपचारों के अधिकार को डी अम्बेडकर ने संविधान का हृदय और आत्मा कहा है। रिट- (i) बंदी प्रत्यक्षीकरण (ii) परमादेश (ii) प्रतिषेध (iv) अधिकार पृच्छा (v) उत्प्रेषण।
6.   नीति निर्देशक तत्वों के उद्देश्यों एवं नीतियों को सविस्तार समझाइए
उत्तर-
·         लोगों का कल्याणसामाजिकआर्थिक एवं राजनीतिक न्याय।
·         जीवन स्तर ऊँचा उठानासंसाधनों का समान वितरण।
·         अन्तर्राष्ट्रीय शांति को बढ़ावा।
नीतियां- समान नागरिक संहितामद्दपान निषेधघरेलू उद्योगों को बढ़ावाउपयोगी पशुओ को मारने पर रोक। ग्राम पंचायतों को प्रोत्साह
7.   मौलिक अधिकारों एवं राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर-
ü  मौलिक अधिकार न्याय योग है। नीति निर्देशक तत्व नहीं।
ü  मौलिक अधिकार निषेधात्मक जबकि नीति निर्देश तत्व सकारात्मक है।
ü  मौलिक अधिकार व्यक्ति से जबकि नीति निर्देशक तत्व समाज से संबंधित है।
ü  मौलिक अधिकार का क्षेत्र सीमित है। नीति निर्देशक तत्वों का क्षेत्र विस्तृत है।
ü  मौलिक अधिकार राजनीतिक लोकतंत्र है। निर्देशक तत्व आर्थिक लोकतंत्र है आदि।
ü  मौलिक अधिकार प्राप्त हो चुके है। निर्देशक तत्वों को लागू करवाना है।


UPSC Based Questions (250- 450 Words)



1. निम्नलिखित स्थितियों को पढ़ें। प्रत्येक स्थिति के बारे में बताएँ कि किस मौलिक अधिकार का उपयोग या उल्लंघन हो रहा है और कैसे?
A.    राष्ट्रीय एयरलाइन के चालक-परिचालक दल (Cabin-Crew) के ऐसे पुरुषों को जिनका वजन ज़्यादा है-नौकरी में तरक्की दी गई लेकिन उनकी ऐसी बढ़ गया था।
B.     एक निर्देशक एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाता है जिसमें सरकारी नीतियों की आलोचना है।
C.    एक बड़े बाँध के कारण विस्थापित हुए लोग अपने पुनर्वास की माँग करते हुए रैली निकालते हैं।
D.    आंध्र-सोसायटी आंध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु माध्यम से विद्यालय चलाती है।
उत्तर-
A.    राष्ट्रीय एयरलाइन के चालक-परिचालक दल के ऐसे पुरुषों को जिनका वजन ज़्यादा है-नौकरी में पदोन्नति दी गई लेकिन उनकी ऐसी महिला सहकर्मियों कोदंडित किया गया जिनका वज़न बढ़ गया था। इस स्थिति के अंतर्गत महिला सहकर्मियों के समानता के अधिकार का उल्लंघन होता हैक्योंकि संविधान के अनुच्छेद 14 द्वारा सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समता तथा विधि का समान संरक्षण प्रदान किया गया है। अनुच्छेद 15(1) में इसे और ज़्यादा स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि राज्य किसी नागरिक के धर्मलिंगमूलवंशजातिजन्म-स्थान या इनमें किसी भी आधार पर निर्भर नहीं करेगा।
अनुच्छेद 16 में लोक नियोजन के विषय में अवसर की समता के मूल अधिकार का प्रावधान है। इसी अनुच्छेद के खंड में कहा गया है कि राज्य के अधीन किसी पद पर नियोजन या नियुक्ति से संबंधित विषय पर सभी नागरिकों के लिए अवसर की समता होगी तथा खंड में कहा गया है कि राज्य के अधीन किसी नियोजन या पद के संबंध में केवल धर्ममूलवंशलिंगउद्भवजन्म-स्थाननिवास-स्थानया इनमें से किसी आधार पर  तो कोई नागरिक अयोग्य होगा और  ही उसके साथ किसी प्रकार का भेदभाव किया जाएगा।
इस घटना में महिला कर्मियों के साथ लिंग के आधार पर भेदभाव किया गया है और उन्हें पदोन्नति से वंचित किया गया। इस प्रकार इनके संविधान प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है।
B.     एक निर्देशक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाता है और इसके द्वारा वह सरकार की नीतियों की आलोचना करता है। इस घटना में निर्देशक संविधान के अनुच्छेद 19 (1) द्वारा प्रदत्त वाक् एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उपयोग करता है। इसके अंतर्गत भारत के सभी नागरिकों को सरकार की बिना पूर्व अनुमति के अपने विचारों को प्रकाशितप्रचारित करने का अधिकार है।
C.    इस घटना में एक बड़े बाँध के कारण विस्थापित हुए लोग अपने पुनर्वास की माँग करते हुए रैली निकालते हैं। यहाँ पर उनके द्वारा संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (में प्रत्याभूत शांतिपूर्ण एवं निरस्त्र सम्मेलन की स्वतंत्रता का उपयोग किया गया है।
D.    आध्र-सोसायटी द्वारा आध्र प्रदेश के बाहर तेलुगु माध्यम से विद्यालय के चलाए जाने की घटना में अनुच्छेद 30 (1) द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार का उपयोग किया गया है। इस अनुच्छेद द्वारा धर्म या भाषा पर आधारभूत सभी अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि के अनुसार शिक्षा संस्था को स्थापित करने तथा उनके प्रशासन का अधिकार प्राप्त है।



2. निम्नलिखित में कौन सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या है?
A.    शैक्षिक-संस्था खोलने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के ही बच्चे उस संस्था में पढ़ाई कर सकते हैं।
B.     सरकारी विद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अल्पसंख्यक-वर्ग के बच्चों को उनकी संस्कृति और धर्म-विश्वासों से परिचित कराया जाए।
C.    भाषायी और धार्मिक-अल्पसंख्यक अपने बच्चों के लिए विद्यालय खोल सकते हैं और उनके लिए इन विद्यालयों को आरक्षित कर सकते हैं।
D.    भाषायी और धार्मिक-अल्पसंख्यक यह माँग कर सकते हैं कि उनके बच्चे उनके द्वारा संचालित शैक्षणिक-संस्थाओं के अतिरिक्त किसी अन्य संस्थान में नहीं पढ़ेंगे।
उत्तर- उपरोक्त कथनों में से (में दिया गया कथन सांस्कृतिक और शैक्षिक अधिकारों की सही व्याख्या करता है। संविधान के अनुच्छेद 29 (1) के अनुसार अल्पसंख्यक वर्गों के हितों के संरक्षण हेतु उन्हें अपनी विशेष भाषालिपि या संस्कृति को बनाए रखने का अधिकार है। अनुच्छेद 30 (1) में यह प्रावधान है कि अल्पसंख्यक वर्गों को अपनी रुचि की शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार है।



3. इनमें कौन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है और क्यों?
A.    न्यूनतम देय मज़दूरी नहीं देना।
B.     किसी पुस्तक पर प्रतिबन्ध लगाना।
C.    बजे रात के बाद लाउड-स्पीकर बजाने पर रोक लगाना।
D.    भाषण तैयार करना।
उत्तर-
A.    इसमें 'शोषण के विरुद्ध अधिकारका उल्लंघन हो रहा है। क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 23 द्वारा मानव के दुव्यापार और बेगार तथा इस तरह का अन्य जबरदस्ती लिया जाने वाला श्रम प्रतिबंधित है। इस अधिकार का उद्देश्य दुराचारी व्यक्तियों तथा राज्य द्वारा समाज के दुर्बल वर्गों के शोषण को रोकना तथा साथ ही समान विकास का पहले भी प्रदान किया जाता है।
B.     किसी पुस्तक पर प्रतिबंध लगाए जाने से यद्यपि कि उस व्यक्ति के वाक एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन तो होता है ,लेकिन इसके साथ ही यह भी आवश्यक है कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यदि इससे किसी वर्ग या समुदाय-विशेष की भावनाएँ आहत होती हैं तो सदाचार एवं शिष्टाचार के हित में उन पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
C.    उसी प्रकार रात्रि बजे के बाद लाउड-स्पीकर पर प्रतिबंध लगाने की दूसरी घटना में भी समाज के व्यापक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है। अतः यहाँ भी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं हो रहा है।
D.    भाषण तैयार करना किसी मौलिक अधिकार का उल्लघंन नहीं है क्योंकि नागरिकों को विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।



4. गरीबों के बीच काम कर रहे एक कार्यकर्ता का कहना है कि गरीबों को मौलिक अधिकारों की ज़रूरत नहीं है। उनके लिए ज़रूरी यह है कि नीति-निर्देशक सिद्धांतों को कानूनी तौर पर बाध्यकारी बना दिया जाए। क्या आप इससे सहमत हैंअपने उत्तर का कारण बताएँ।
उत्तर- संविधान में नीति-निर्देशक तत्व और मौलिक अधिकारों के प्रावधानों का प्रमुख उद्देश्य जनकल्याण तथा न्याय राजनीतिक प्रजातंत्र की स्थापना का प्रयास किया गया हैवहीं नीति-निर्देशक तत्वों द्वारा आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना का प्रयास किया गया है। मौलिक अधिकार न्यायालय में वाद-योग्य और इनके साथ कानून की शक्ति है;
जबकि नीति-निर्देशक सिद्धांतों के साथ कानून की शक्ति  होकर केवल राजनैतिक और नैतिक शक्ति है। चूँकि नीति-निर्देशक सिद्धांतों में समाज के व्यापक हित और उन्नयन का प्रावधान निहित हैइन्हें कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाकर इन लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित की जा सकती है। इनके प्रभावी क्रियान्वयन द्वारा राज्य के आदर्शों एवं लक्ष्यों को प्राप्त करना सरल होगा। इस प्रकार हम देखते हैं कि की अपेक्षा नीति-निर्देशक तत्वों को कानूनी तौर पर बाध्य नहीं बनाना अधिक श्रेयकर है।



5. अनेक रिपोर्टों से पता चलता है कि जो जातियाँ पहले झाड़ू देने के काम में लगी थीं उन्हें अब भी मज़बूरन यही काम करना पड़ रहा है। जो लोग अधिकार-पद पर बैठे हैं वे इन्हें कोई और श्रम नहीं देते। इनके बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने पर हतोत्साहित किया जाता है। इस उदाहरण में किस मौलिक-अधिकार का उल्लंघन हो रहा है?
उत्तर- उपर्युक्त घटना में वर्णित जातियों के कई मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। इनका विवरण इस प्रकार है-
समानता का अधिकार- इस स्थिति में इनके समानता के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है। अनुच्छेद 14 के अनुसार भारत के राज्य क्षेत्र में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति कानून के समक्ष समान है। अनुच्छेद 15 के अनुसार किसी भी नागरिक के विरुद्ध मूलवंशजातिलिंगधर्मजन्म-स्थान के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव निषिद्ध है।
स्वतंत्रता का अधिकार- ऐसी स्थिति में उनकी स्वतंत्रता के अधिकार का हनन हो रहा है। इस स्थिति में हम देख सकते है की इन जातियों को विवश होकर वही श्रम करना पड़ रहा हैक्योंकि वे इसी व्यवसाय को अपनाने के लिए बाध्य हैं। यह विदित है कि संविधान के अनुच्छेद 19 के अनुसार सभी नागरिको को अपनी इच्छानुसार वृत्तिआजीविका की स्वतंत्रता व्यवसायव्यापार,प्रदान की गई है। अतः उपर्युक्त घटना वर्णित जातियों के स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है।
संस्कृति और शिक्षा का अधिकार- इस घटना में बच्चों को पढ़ाई-लिखाई करने से हतोत्साहित किया जाना उनके सांस्कृतिक और शिक्षा संबंधी अधिकार का उल्लंघन है। अनुच्छेद 29 (2) के अनुसार किसी भी आधार पर राज्य द्वारा सहायता प्राप्त किसी शिक्षा संस्थान में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता है।



6. एक मानवाधिकार-समूह ने अपनी याचिका में अदालत का ध्यान देश में मौजूद भूखमरी की स्थिति की तरफ खींचा। भारतीय खाद्य-निगम के गोदामों में करोड़ टन से ज़्यादा अनाज भरा हुआ था। शोध से पता चलता है कि अधिकांश राशन-कार्डधारी यह भी नहीं जानते कि उचित-मूल्य की दुकानों से कितनी मात्रा में वे अनाज खरीद सकते हैं। मानवाधिकार समूह ने अपनी याचिका में अदालत से निवेदन किया कि वह सरकार को सावर्जनिक-वितरण-प्रणाली में सुधार करने पा आदेश दे।
A.    इस मामले में कौन-कौन से अधिकार शामिल हैंये अधिकार आपस में किस तरह जुड़े हैं?
B.     क्या ये अधिकार जीवन के अधिकार का एक अंग हैं?
उत्तर-
A.    इस सिथति में संवैधानिक उपचार का अधिकारस्वतंत्रता का अधिकारशोषण के विरुद्ध अधिकारतथा सूचना का अधिका शामिल हैं। मानवाधिकार समूह द्वारा अदालत में याचिका दायर करना संवैधानिक उपचार का अधिकार है। भूख से होने वाली मौत जीने के अधिकार का उल्लंघन है। राशन कार्डधारी को उचित मूल्य की दुकान से मिलने वाली अनाज की मात्रा का  मालूम होनाउनके सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।
B.     ये सभी अधिकार एक दूसरे सर भिन्न हैं। परंतु इस घटना में ये सभी जीवन के अधिकार के अंग हैं।



7. इस अध्याय में सोमनाथ लाहिड़ी द्वारा संविधान-सभा में दिए गए वक्तव्य को पढ़ें। क्या आप उनके वक्तव्य से सहमत हैंयदि हाँ तो इसकी पुष्टि में कुछ उदाहरण दें। यदि नहींतो उनके कथन के विरुद्ध तर्क प्रस्तुत करें।
उत्तर- सोमनाथ लाहिड़ी द्वारा संविधान सभा में कहे गए कथन से यह स्पस्ट होता है कि भारतीय संविधान द्वारा नागरिकों को जो भी मौलिक अधिकार दिए गए हैंवे अपर्याप्त हैं। कई ऐसी बातों की उपेक्षा की गई है जिन्हें मूल अधिकारों में स्थान दिया जा सकता थाजैसे-जीविका का अधिकारशिक्षा का अधिकारसूचना का अधिकारचिकित्सासुविधा का अधिकार इत्यादि।
प्रथम तीन अधिकारों को मौलिक अधिकारों में शामिल कर लिया गया है लेकिन चिकित्सा-सुविधा के अधिकार इत्यादि को नहीं। चिकित्सा-सुविधा का अधिकार जो किसी भी राष्ट्र के सर्वागीण विकास की आधारशिला रखती हैकी उपेक्षा आलोचकों की दृष्टि से राष्ट्रहित के प्रतिकूल है। लाहिड़ी के असंतोष का दूसरा कारण यह है कि प्रत्येक मौलिक अधिकार के साथ प्रतिबंध का प्रावधान हैजिससे यह निश्चय करना कठिन होता है कि ऐसी स्थिति में मूल अधिकारों का क्या लाभ है?
आलोचकों का मत है कि भारतीय संविधान एक हाथ से मौलिक अधिकार देता है तो दूसरे हाथ से इसे छीन लेता है। संविधान द्वारा जिस प्रकार विशेष परिस्थतियों में अलग-अलग प्रतिबंध लगाए गए हैंउसने मौलिक का यह कथन है कि-"अनेक मौलिक अधिकारों को एक सिपाही के दृष्टिकोण से बनाया गया है। मौलिक अधिकारों की आलोचना करते हुए विष्णु कामथ ने भी संविधान सभा में कहा था कि-"इस व्यवस्था द्वारा तानाशाही राज्य और पुलिस राज्य की स्थापना कर रहे हैं।"



8. आपके अनुसार कौन-सा मौलिक अधिकार सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण हैइसके प्रावधानों को संक्षेप में लिखें और तर्क देकर बताएँ कि यह क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर- भारतीय संविधान के भाग में वर्णित मौलिक अधिकारों की संख्या मूल संविधान में थी। 1978 में 44 वें संशोधन अधिनियमद्वारा संपत्ति के अधिकार को मूल अधिकारों की सूची से हटा दिया गया। इस तरह मौलिक अधिकारों की संख्या हो गई। बाद में ये 86वें संशोधन अधिनियम द्वारा प्राथमिक शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा भी प्रदान किया गया। एक बार फिर मौलिक अधिकारों की संख्या हो गई।
संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकार निम्नलिखित हैं-
1.      समता का अधिकार,
2.      स्वतंत्रता का अधिकार,
3.      शोषण के विरुद्ध अधिकार,
4.      धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार,
5.      सांस्कृतिक और शिक्षा का अधिकार,
6.      संवैधानिक उपचारों का अधिकार।
किसी भी अधिकार की उपयोगिता तब मानी जाती है जब उससे राज्य की जनता  राज्य द्वारा मान्यता प्रदान की जाति है। संवैधानिक उपचारों का अधिकार इस दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है कि संविधान के अनुच्छेद 32 तथा 226 में वर्णित अधिकार अर्थात् संवैधानिक उपचारों का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त अन्य मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। राज्य द्वारा अन्य मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की स्थिति में उच्चतम न्यायालय एवं उच्च-न्यायालय को इन अधिकारों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कानूनी कार्यवाही का अधिकार दिया गया है।
अतः इसे संविधान द्वारा वर्णित संपूर्ण भवन की आधारशिला कहा गया है। संविधान के अनुच्छेद 32 द्वारा दिए गए संवैधानिक उपचारों के अधिकार के तहत कोई भी नागरिक अपने अधिकारों के हनन के विरुद्ध न्यायालय में प्रार्थना-पत्र देकर अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है। इसके लिए न्यायालय पाँच प्रकार के रिट जारी कर सकता है। यह रिट हैं-बंदी-प्रत्यक्षीकरणपरमादेशनिषेध आदेशउत्प्रेषणऔर अधिकार पृच्छा।
इस वर्णन के बाद हम यह कह सकते है की संवैधानिक उपचार का अधिकार सबसे महत्त्वपूर्ण मौलिक अधिकार है। इसी उपयोगिता के आधार पर डॉ० भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान की मूल आत्मा तथा मर्म बताया है।


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