कक्षा 10 (पाठ - 1) यूरोप में राष्ट्रीयवाद का उदय Part-4

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राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद: 
         उन्नीसवीं सदी के अंत आते आते राष्ट्रवाद में उदारवादी और प्रजातांत्रिक भावनाओं की कमी होने लगी। यह एक हथियार बन गया जिससे क्षणिक लक्ष्यों को साधा जाने लगा। यूरोप की मुख्य ताकतों ने लोगों की राष्ट्रवादी भावना का इस्तेमाल अपने साम्राज्यवादी महात्वाकांछाओं को साधने के लिए शुरु कर दिया।

बाल्कन में संकट: 
बाल्कन ऐसा क्षेत्र था जहाँ भौगोलिक और नस्ली विविधता भरपूर थी। आज के रोमानियाबुल्गेरियाअल्बेनियाग्रीसमैकेडोनियाक्रोशियाबोस्निया-हर्जेगोविनास्लोवेनियासर्बिया और मॉन्टेनीग्रो इसी क्षेत्र में आते थे। इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों को मोटे तौर पर स्लाव कहा जाता था।
बाल्कन का एक बड़ा हिस्सा ओटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में था। यह वह दौर था जब ओटोमन साम्राज्य बिखर रहा था और बाल्कन में रोमांटिक राष्ट्रवादी भावना बढ़ रही थी। इसलिए यह क्षेत्र ऐसा था जैसे किसी बारूद की ढ़ेर पर बैठा हो। पूरी उन्नीसवीं सदी में ओटोमन साम्राज्य ने आधुनिकीकरण और आंतरिक सुधारों से अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिश की थी। लेकिन इसमे उसे अधिक सफलता नहीं मिली। इसके नियंत्रण में आने वाले यूरोपीय देश एक एक करके इससे अलग होते गए और अपनी आजादी घोषित करते गए। बाल्कन के देशों ने अपने इतिहास और राष्ट्रीय पहचान का हवाला देते हुए अलग होने की घोषणा की। लेकिन जब ये देश अपनी पहचान बनाने और आजादी पाने के लिए संघर्ष कर रहे थे तब यह क्षेत्र कई गंभीर झगड़ों का अखाड़ा बन चुका था। इस प्रक्रिया में बाल्कन के क्षेत्र में ताकत हथियाने के लिए भी जबरदस्त लड़ाई जारी थी।
उसी दौरान विभिन्न यूरोपियन ताकतों के बीच उपनिवेशों और व्यापार को लेकर कशमकश चल रही थीऔर वह झगड़ा नौसेना और सेना की ताकत बनाने लिए भी जारी था। रूसजर्मनीइंगलैंडऑस्ट्रो-हंगरीहर शक्ति का लक्ष्य था कि किस तरह से बाल्कन पर नियंत्रण पाया जाए और फिर अन्य क्षेत्रों पर्। इसके कारण कई लड़ाइयाँ हुईंजिसकी परिणति प्रथम विश्व युद्ध के रूप में हुई।
इस बीच उन्नीसवीं सदी में यूरोपियन शक्तियों के उपनिवेश बने कई देश अब उपनिवेशी ताकतों का विरोध शुरु कर चुके थे। अलग-अलग उपनिवेशों के लोगों ने राष्ट्रवाद की अपनी नई परिभाषा बनाई। इस तरह से राष्ट्र’ का आइडिया एक विश्वव्यापी आइडिया बन गया।

राष्ट्रवाद और साम्राज्यवाद:-
आदर्शवादी राष्ट्रवादएक दूसरे के अनुसारलडने के लिए तैयार रहते थे। 
1. 1857 
केबाद यूरोप के बाल्कन क्षेत्र में तनाव आपसी भौगोलिक और जातीय भिन्नता स्लाव का नाम दिया गया। आटोमन साम्राज्य के नियंत्रण में राष्ट्रवाद के विचारों के फैसले से आटोमन साम्राज्य के विघटन का विस्फोट। 
2. 
विभिन्न स्लाव राष्ट्रीय समूहों की पहचानआपसी टकराव। 
3. 
इसी समय यूरोपीय शक्तियों बीच व्यापार और उपनिवेशों के लिए प्रतिस्पर्धी और प्रथम विश्व युद्ध। 
4. 
राष्ट्रवादी देशों में साम्राज्य विरोधी आंदोलन विकसित हुए समाजों का राष्ट्र राज्यों में गठित किया जाना।

1815 के बाद एक नया रूढ़िवाद:-
1. 1815 में नेपोलियन की हार के बाद यूरोपीय सरकारें रूढ़िवाद की भावना। राज्य और समाज की स्थापित पारंपरिक संस्थाए - राजतंत्रचर्च। सामाजिक ऊंच नीच सपेन्ति और परिवार को बनाए रखना। 
2. 1815 
में बिट्रेनरूस प्रशा और आस्ट्रिया यूरोपीय शक्तियों ने नेपोलियन को हराया। 1815 की वियना संधि बूर्बो वंश को सत्ता ने बहाल किया। 
3. 1815 
में स्थापित रूढ़िवाद शासन व्यवस्थाएँ की निरकुंशता को खत्म किया। ज्यादातर सरकारों ने सेंसरशिप के नियम बनाएफ्रांसीसी क्रांति से जुडे सिद्धांतों को अपनाया।
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