। मध्यपाषाण काल।
। Mesolithic Age। Part-2।

प्रमुख मध्यपाषाण कालिक क्षेत्र-
यहाँ यह ध्यातव्य है कि केरल और उत्तर पूर्वी राज्यों में न तो निम्न पुरापाषाणिक स्थल प्राप्त हुए हैं और न ही मध्य पाषाणिक स्थल।
साँभर झील निक्षेप-
→ राजस्थान में स्थित साँभर झील निक्षेप के कई मध्य सै 7000 ई.पू. के लगभग विश्व के सबसे पुराने वृक्षारोपण का साक्ष्य प्राप्त हुआ है।
लंघनाम-
→ गुजरात के मेहसाना जिले में स्थित इस नगर की खोज एच. डी. सांकालिया द्वारा 1941 में की गई। यह माइक्रोलिथ इंडस्ट्रियल साइट है जहाँ 13,000 से ज्यादा उपकरण प्राप्त हुई हैं। यहाँ से 15 मानव कंकाल भी प्राप्त हुए हैं जिसकी औसत आयु (164-174 सेमी) से इनके भूमध्य सागरीय प्रजाति के होने का संकेत मिलता है। यहाँ से एकल शवाधान का साक्ष्य प्राप्त हुआ है (पूर्व-पश्चिम दिशा में)।
सराय नाहरराय-
→ उत्तर प्रदेश में स्थित इस स्थल से ग्यारह मानव कंकाल प्राप्त हुए हैं जिससे प्रतीत होता है कि यहाँ काकेशस प्रजाति और प्रोटो-नोर्डिक रेस (Proto-Nordic Race) के लोग रहते थे। यहीं से क्रम में आठ चूल्हे प्राप्त हुए हैं जिन्हें सामुदायिक चूल्हा कहा गया है। सराय नाहरराय की रेडियो कार्बन तिथि ई.पू., 8395 पाई गई है।
महादाहा-
→ यह स्थल उत्तर प्रदेश में स्थित है। मध्यपाषाण कालिक स्थलों में सर्वाधिक 28 कंकालों की प्राप्ति यहीं से हुई है। सराय नाहरराय की तरह प्रोटो-नोर्डिक प्रजाति के लोग यहाँ रहते थे। यहाँ से एकल, युगल और सामूहिक-तीनों प्रकार के शवाधान के साक्ष्य मिलते हैं।
भीमबेटका-
→ पुराने मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में स्थित भीमबेटका से मानवीय क्रियाकलापों से संबधित गुफा चित्रकारी के सर्वाधिक साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यहाँ से प्राकृतिक या अनुकरणात्मक और संकेतात्मक दोनों प्रकार के चित्र प्राप्त हुए हैं। यहाँ की गुफाओं पुरापाषाणिक और मध्यपाषाणकालिक दौर के दो कंकाल प्राप्त हुए हैं जिनमें से एक बच्चे के गले में पड़ा ताबीज, जादू-टोने में, इनके विश्वास का प्रतीक है। यहाँ से सामुदायिक जीवन के संकेत मिलते हैं।
वीरभानपुर-
→ पश्चिम बंगाल स्थित इस स्थल से लंघनाज के बाद सर्वाधिक उपकरण प्राप्त हुए हैं।
टेरी टेला या टेरी समूह-
→ यह स्थल तमिलनाडु में स्थित है। टेरी टेला का अर्थ होता है बालू का टीला। यहाँ से मध्यपाषाण काल के ग्यारह बालू के टीले प्राप्त हुए हैं। यहाँ से फ्लिंट और चर्ट निर्मित उपकरण प्राप्त हुए हैं।















