
Q.28 - फिक्स्ड डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) क्या है? भारतीय संदर्भ में उनके फायदों और नुकसानों का उल्लेख कीजिये। (250 शब्द)
उत्तर :
फिक्सड डोज़ कॉम्बिनेशन ऐसी दवाओं को कहा जाता है, जिसे दो या दो से अधिक दवाओं के एक निश्चित अनुपात में संयोजन से बनाया जाता है। उदाहरण के लिये पैरासिटामॉल और एस्पिरिन दो अलग-अलग दवाएँ हैं। इन्हें मिलाकर अगर कोई नई दवा बनाई जाती है तो उसे फिक्सड डोज़ कॉम्बिनेशन कहा जाता है। इन दवाओं में कोरेक्स, सेरेडॉन, डी कोल्ड टोटल आदि प्रमुख हैं।
केंद्र सरकार ने 2016 में लगभग 350 फिक्स डोज़ कॉम्बिनेशन दवाओं को अवैज्ञानिक और स्वास्थ्य के लिये हानिकारक मानते हुए उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। अभी हाल में सुप्रीम कोर्ट ने इन दवाओं की वैज्ञानिकता और सेफ्टी के संबंध में अध्ययन करने के लिये समिति गठित करने को कहा है।
भारतीय संदर्भ में फिक्स डोज़ कॉम्बिनेशन के निम्नलिखित फायदे हैं-
→ इसके द्वारा मरीज़ों को अधिक दवाइयों को लेने से राहत मिलती है। प्रत्येक दवा के अलग-अलग लेने की स्थिति में प्रत्येक के निर्देश को ध्यान में रखना जटिल होता है।
→ ये अपेक्षाकृत सस्ती होने के कारण गरीबों के लिये वहनीय होती है। इससे उन पर ज़्यादा वित्तीय बोझ नहीं होता है।
→ एफडीसी दवाओं में प्रयोग की जाने वाली दवाइयों का एक-दूसरे से रिएक्शन करने की संभावना कम रहती है। अत: इसके सेवन से साइड इपेक्ट होने का खतरा कम रहता है।
→ लेकिन फिक्स डोज़ कॉम्बिनेशन दवाओं के प्रयोग के नुकसान भी हैं, जैसे:
→ ये स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित नहीं मानी जाती हैं। काकोट समिति ने अपनी रिपोर्ट में इसे असुरक्षित तथा एंटीबायोटिक प्रतिरोध को बढ़ावा देने वाली बताया था।
→ कई दवाएँ राष्ट्रीय दवा नियामक (द सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल संगठन) द्वारा बिना स्वीकृति के बेची जा रही हैं। इनमें से अधिकांश दर्द निवारक, अवसाद रोधी तथा मानसिक रुग्णता से संबंधित हैं। अत: इनके दुष्प्रभाव की संभावना ज़्यादा है।
निष्कर्ष:
कह सकते हैं कि फिक्स डोज कॉम्बिनेशन दवाएँ भारत के लिये आर्थिक दृष्टि से लाभदायक हैं तो इनकी बिक्री की उचित विनियमन के अभाव के कारण दुष्प्रभाव की भी संभावना है। अत: इस दिशा उचित निगरानी तंत्र का निर्माण कर सुरक्षित दवाओं की बिक्री ही सुनिश्चित की जानी चाहिये।















